अब 100, 101, 102, 108 और 1091 जैसे अलग-अलग इमरजेंसी नंबरों के झंझट से लोगों को राहत मिलने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि पूरे देश में आपातकालीन सेवाओं के लिए सिर्फ एक हेल्पलाइन नंबर 112 को पूरी तरह लागू किया जाए। ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम Court ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे अगले तीन महीने के भीतर 112 नंबर को पूरी तरह ऑपरेशनल करें। कोर्ट ने कहा कि ट्रॉमा के समय तुरंत इलाज मिलना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।

हर मिनट की देरी पड़ सकती है भारी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़क हादसे या किसी गंभीर आपात स्थिति में घायल व्यक्ति सदमे और घबराहट में होता है। ऐसे समय में मदद मिलने में हर मिनट की देरी उसकी जान के लिए खतरा बन सकती है। अदालत ने साफ कहा— “तेजी ही जीवनरक्षक दवा है।” कोर्ट ने यह भी माना कि कई लोग घायल की मदद करना चाहते हैं, लेकिन पुलिस पूछताछ, कोर्ट-कचहरी और कानूनी परेशानियों के डर से पीछे हट जाते हैं। इसलिए राज्यों को प्रभावी ‘गुड समैरिटन’ शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया गया है, ताकि मदद करने वालों को परेशान न किया जाए।
GPS से लैस होंगी सभी एंबुलेंस
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि सरकारी और निजी सभी एंबुलेंस को AIS-125 मानकों के अनुसार GPS और Vehicle Location Tracking Device (VLTD) से लैस किया जाए। इन सभी को 112 हेल्पलाइन से रियल-टाइम में जोड़ा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत लोकेशन ट्रैक कर मदद पहुंचाई जा सके। अदालत ने कहा कि ट्रॉमा देखभाल और समय पर इलाज, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन के अधिकार’ का हिस्सा है। केंद्र सरकार को ट्रॉमा मामलों के लिए मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल जारी करने और राज्यों को उसे लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।



