छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों पर कड़ा नियम लागू—बिना अनुमति किसी संगठन के कार्यक्रम में शामिल होने पर रोक, उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई होगी

रायपुर। प्रदेश सरकार ने शासकीय सेवकों के लिए ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम’ के तहत एक महत्वपूर्ण और सख्त आदेश जारी किया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी किसी भी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं हो सकेगा और न ही किसी राजनीतिक पद पर आसीन रह सकेगा। आदेश में सभी विभागों, संभाग आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को कड़ाई से नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।


इन गतिविधियों पर रहेगा पूर्ण प्रतिबंध


आदेश के अनुसार, किसी भी शासकीय सेवक के लिए इन चार बिंदुओं का पालन अनिवार्य होगा:

  1. सक्रिय सदस्यता: कोई भी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल या संगठन का सक्रिय सदस्य नहीं हो सकता।
  2. चुनावी व राजनीतिक हिस्सा: प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी राजनीतिक गतिविधि में भाग लेने पर पूरी तरह रोक होगी।
  3. अनुमति के बिना पद: किसी भी अन्य सरकारी या गैर-सरकारी संस्था, समिति या निकाय में बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के कोई पद धारण नहीं किया जा सकेगा।
  4. निष्पक्षता का प्रभाव: कर्मचारी ऐसा कोई भी दायित्व स्वीकार नहीं करेंगे जिससे उनके शासकीय कार्यों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हों।
  5. नियमों के उल्लंघन पर ‘कठोर’ कार्रवाई की चेतावनी

शासन ने साफ कर दिया है कि यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965’ तथा ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966’ के प्रावधानों के तहत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

देखें आदेश


सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कुछ कर्मचारियों को अब शाखा में शामिल होने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ सकती है। वहीं, कॉलोनियों और आवासीय क्षेत्रों में समिति पदों जैसे अध्यक्ष या सचिव के रूप में कार्यरत कर्मचारियों को भी या तो पद छोड़ना होगा या विभागीय अनुमति लेनी होगी। इस आदेश के बाद मंत्रालय से लेकर विभिन्न विभागीय कार्यालयों में हलचल देखी जा रही है।





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