रायपुर। मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर ने सरकार को डीकेएस पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च सेंटर में अध्ययनरत एमसीएच (MCH Student) छात्रों के लिए हर महीने 70 से 76 हजार रुपए स्टायपेंड का प्रस्ताव भेजा है. हालांकि, एमसीएच (MCH) छात्रों ने इसे कम बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर स्टायपेंड बढ़ाने की मांग की है.

दरअसल, प्रदेश में सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों के लिए अलग से कोई कैडर नहीं है, जिस कारण उन्हें सामान्य स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की तरह वेतन और स्टायपेंड दिया जा रहा है. वर्तमान में, एमसीएच छात्रों को एमडी-एमएस जैसे 67,500 से 74,600 रुपए मासिक स्टायपेंड मिल रहा हैं. कमिश्नर ने पेइंग वार्ड के किराए को 5 हजार से घटाकर 2,500 रुपए करने का भी प्रस्ताव रखा है. डीकेएस अस्पताल में पेइंग वार्ड को हॉस्टल के रूप में परिवर्तित किया गया है. छात्रों का कहना है कि अन्य राज्यों में एमसीएच छात्रों को ज्यादा स्टायपेंड मिल रहा है. जैसे, मध्यप्रदेश में 77 हजार, महाराष्ट्र में 95 हजार, गुजरात में 1 लाख से 1.12 लाख और उत्तरप्रदेश में 1.27 से 1.33 लाख रुपए तक स्टायपेंड दिया जा रहा है. फरवरी में डीकेएस प्रबंधन ने 78 से 86 हजार रुपए मासिक स्टायपेंड का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन कमिश्नर ने इसे घटाकर 70 से 76 हजार रुपए कर दिया है. कमिश्नर ने तर्क दिया कि एमसीएच छात्र दो साल के बॉन्ड में नहीं रहते, इसलिए उन्हें अनुबंधित डॉक्टरों के मुकाबले कम स्टायपेंड देना उचित होगा. स्टायपेंड बढ़ाने से केवल 2.58 लाख रुपए सालाना अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा, लेकिन वर्तमान में छात्रों की संख्या कम है. भविष्य में डीएम कोर्स शुरू होने के बाद सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना है. आंको सर्जरी विभाग में एमसीएच की 3 नई सीटों को मंजूरी मिल चुकी है, और इस सत्र से वहां भी एडमिशन होगा. इन छात्रों को भी डीकेएस की तरह स्टायपेंड मिलेगा.

