ओह्ह नो : सकरी में खाखी पर खामोशी का आरोप ? पुलिस के सामने कथित दबंगई, सहमा परिवार लगाता रहा जान बचाने की गुहार. टीआई शिंदे की दलील और देखिए तस्वीरें.

• थाने के भीतर युवक और पत्नी से झूमाझटकी का आरोप, बाहर भी गाली-गलौज और धमकी का दावा.


• पुलिस की मौजूदगी में बिगड़ते हालात पर सवाल, थाना प्रभारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में.


बिलासपुर. न्यायधानी में कानून की रखवाली करने वाली खाकी की मौजूदगी में ही यदि कोई परिवार खुद को असुरक्षित महसूस करे, तो सवाल सिर्फ आरोपियो की कथित दबंगई पर नहीं, बल्कि पुलिस की सक्रियता और जवाबदेही पर भी उठेंगे। जी साहब जी ,जी साहब जी वाले थानेदार के सकरी थाने से सामने आए घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ताओं और जनपद उपाध्यक्ष के साथियों ने थाने के भीतर युवक और उसकी पत्नी के साथ झूमाझटकी की, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि पीड़ित परिवार वीडियो बनाकर अपनी जान बचाने की गुहार लगाता रहा, जबकि पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे। घटना की चर्चा खूब वायरल हो रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है जब थाने के भीतर ही फरियादी को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल रहा, तो पुलिस की मौजूदगी का आम नागरिक के लिए मतलब क्या रह जाता है?



• थाने के भीतर कथित झूमाझटकी, खाकी की मौजूदगी पर सवाल.


घटना शुक्रवार रात करीब 10 से 10:30 बजे के बीच सकरी थाने में विवाद होने की बताई जा रही है। आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ताओं और जनपद उपाध्यक्ष के साथियों ने थाने के भीतर मौजूद युवक और उसकी पत्नी के साथ बदसलूकी और झूमाझटकी की। यदि पुलिस की मौजूदगी में ऐसा हुआ, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि विवाद को रोकने और पीड़ितों को तत्काल सुरक्षा देने के लिए मौके पर क्या प्रभावी कदम उठाए गए?


• पुलिस समझाइश देती रही, कथित विवाद थाने के बाहर भी जारी.


बताया जा रहा है कि स्थिति बिगड़ने पर पुलिसकर्मियों ने संबंधित लोगों को थाने से बाहर निकाला। लेकिन आरोप है कि इसके बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ। थाना परिसर के बाहर कथित तौर पर गाली-गलौज और धमकी दी जाती रही। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि हालात इतने तनावपूर्ण थे, तो क्या पुलिस ने संबंधित लोगों को रोकने, पीड़ित परिवार को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और आगे की धमकी रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई की?


• जान बचाने की गुहार लगाता परिवार, आखिर कहां थी सुरक्षा?


इस कथित विवाद को लेकर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवार भयभीत नजर आया और वीडियो बनाकर अपनी सुरक्षा की गुहार लगाता रहा। यही दृश्य पुलिस की जवाबदेही से जुड़ा सबसे गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।


आरोप: थाना प्रभारी अपने चेंबर में बैठे रहे.


घटनाक्रम को लेकर सकरी थाना प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि विवाद के दौरान थाना प्रभारी संजय शिंदे अपने चेंबर में बैठे रहे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्वयं बाहर आकर प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया।



'OMG NEWS' से टीआई शिंदे ने कहा कि.


इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सकरी टीआई संजय शिंदे ने 'OMG NEWS' को बताया कि जो भी आरोप पुलिस पर लग रहे है सारे गलत है,घटना की रात दो पक्ष नशे की हालात में दुर्गा पंडाल में विवाद करने के बाद शिकायत लेकर थाने आए थे। काफी देर की समझाइश के बाद एक पक्ष वापस लौट गया इस बीच नशे में होने के कारण थाना स्टॉफ ने उन्हें बिठाने का प्रयास किया लेकिन वो लोग नहीं मान रहे थे विवाद की कोई स्थिति ही नहीं बनी थी। आज सुबह एक बार फिर दूसरा पक्ष थाने आया जिनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। थाने के अंदर और बाहर हो हंगामा करने वालों के खिलाफ भी तत्वरित कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की गई है जिसका प्रेस नोट कुछ ही देर में रिलीज किया जाएगा, वीडियो किसने बनाया और वायरल किया के सवाल पर टीआई शिंदे का कहना है कि दोनों पक्षों की ओर से भीड़ बहुत थी उन्हीं में से किसी ने वीडियो बनाया होगा.






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