new dilli . बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों की रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में NALSA (National Legal Services Authority) ने जनहित याचिका दायर की है. नालसा ने दयापूर्ण रिहाई के मांग करते हुए वृद्ध दोषियों की गरिमा को बनाए रखने के लिए तत्काल कानूनी हस्तक्षेप का आग्रह किया गया है. याचिका में आर्टिकल 14 और 21 का उल्लंघन और मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इन कैदियों की रिहाई की मांग की गई है.राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की ओर से शुरू किए गए विशेष अभियान के तहत देश भर में बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार दोषियों की रिहाई की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है. NALSA याचिका में बताया है कि न्याय प्रणाली गंभीर रूप से बीमार या वृद्ध कैदियों के साथ किस तरह पेश आती है, इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है. सुप्रीम कोर्ट में NALSA ने तर्क दिया कि ऐसे व्यक्तियों को लगातार कैद में रखना, जिनमें से कई लोगों के पास सही तरीके से डॉक्टरों की देखभाल, दवाइयां तक पहुंच नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत उनके अधिकारों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार सिद्धांतों का उल्लंघन करता है.याचिका में नालसा के के बुजुर्ग कैदियों और असाध्य रूप से बीमार कैदियों के लिए विशेष अभियान का समर्थन किया गया है, जिसे 10 दिसंबर, 2024 (मानवाधिकार दिवस) को न्यायमूर्ति बीआर गवई के मार्गदर्शन में शुरू किया गया था, जो नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष हैं. इस अभियान का उद्देश्य ऐसे कैदियों की पहचान करना, कानूनी सहायता के माध्यम से उनकी रिहाई की सुविधा प्रदान करना और समाज में उनके फिर से एकीकरण का समर्थन करना है.

