शाबाश: वर्दी में अफसर, क्लासरूम में शिक्षक! एसपी मयंक गुर्जर ने जीता बच्चों का दिल.

• रात 8 बजे हॉस्टल पहुंचे सुकमा एसपी, व्यवस्थाओं का लिया जायजा.


• बच्चों को पढ़ाई में उलझा देख खुद संभाल लिया शिक्षक का मोर्चा.


• कमरे को बनाया क्लासरूम, विज्ञान के कठिन विषयों को सरल अंदाज में समझाकर पेश की संवेदनशील पुलिसिंग की मिसाल


सुकमा. पुलिस की वर्दी जब सुरक्षा के साथ शिक्षा और बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी का अहसास भी कराए, तो ऐसे प्रयास अपने आप में मिसाल बन जाते हैं। सुकमा जिले के पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर ने कुछ ऐसा ही प्रेरणादायी उदाहरण पेश किया। मंगलवार रात करीब 8 बजे दोरनापाल स्थित प्री एवं पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास के औचक निरीक्षण पर पहुंचे एसपी ने जहां हॉस्टल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया, वहीं पढ़ाई में जुटे बच्चों के बीच पहुंचकर उनकी शैक्षणिक गतिविधियों में भी रुचि दिखाई। बातों-बातों में जब उन्हें पता चला कि कुछ छात्र विज्ञान विषय की पढ़ाई कर रहे हैं, तो उन्होंने औपचारिक निरीक्षण की सीमाओं से आगे बढ़कर खुद शिक्षक की भूमिका निभानी शुरू कर दी।


निरीक्षण के बीच शिक्षा का पाठ, बच्चों के बीच शिक्षक बने एसपी.


रात के समय छात्रावास पहुंचने पर एसपी मयंक गुर्जर ने बच्चों की दिनचर्या और पढ़ाई के माहौल को करीब से देखा। अधिकांश छात्र अपने-अपने कमरों में पढ़ाई करते हुए मिले। यह देखकर उन्होंने विद्यार्थियों से बातचीत की और उनकी पढ़ाई, विषयों तथा शैक्षणिक गतिविधियों के बारे में जानकारी ली।


इसी दौरान कुछ छात्रों को विज्ञान विषय पढ़ते देख एसपी ने उनसे विषय से जुड़ी बातें पूछीं। इसके बाद उन्होंने विज्ञान के एक महत्वपूर्ण विषय को बेहद सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाने का निर्णय लिया। देखते ही देखते छात्रावास का कमरा क्लासरूम में बदल गया और वर्दीधारी पुलिस अधिकारी बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक की भूमिका में नजर आए।


किताबों से आगे बढ़कर समझाने की कोशिश.


एसपी का यह प्रयास केवल बच्चों से बातचीत करने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने विषय को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की जिज्ञासा बढ़ाने और पढ़ाई को सहज बनाने की कोशिश की। ऐसे संवाद से बच्चों को अपनी शंकाएं रखने और पढ़ाई को लेकर खुलकर बातचीत करने का अवसर मिलता है।


छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई का अनुकूल वातावरण और मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में जिले के पुलिस कप्तान का उनके बीच पहुंचना और शिक्षा के प्रति रुचि दिखाना बच्चों का उत्साह बढ़ाने वाला कदम है।


संवेदनशील पुलिसिंग की सकारात्मक तस्वीर.


आमतौर पर पुलिस अधीक्षक के औचक निरीक्षण की चर्चा सुरक्षा, अनुशासन और व्यवस्थाओं की जांच तक सीमित रहती है, लेकिन मयंक गुर्जर के इस दौरे ने पुलिस की एक संवेदनशील और मानवीय तस्वीर भी सामने रखी। बच्चों के बीच पहुंचकर उनकी पढ़ाई में रुचि लेना यह संदेश देता है कि समाज की सुरक्षा के साथ नई पीढ़ी का आत्मविश्वास और भविष्य भी महत्वपूर्ण है।


ऐसे प्रयासों को मिलनी चाहिए शाबाशी.


पुलिस की जिम्मेदारी अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक जरूर है, लेकिन समाज के प्रति उसकी सकारात्मक भागीदारी का दायरा इससे कहीं व्यापक है। सुकमा जैसे क्षेत्र में छात्रावास के बच्चों के बीच पहुंचकर उनकी पढ़ाई में दिलचस्पी लेना और कठिन विषय को आसान बनाने की कोशिश करना सराहनीय पहल है।


एसपी मयंक गुर्जर का यह अंदाज बच्चों के लिए प्रेरणा बनने के साथ अन्य अधिकारियों के लिए भी संदेश है कि जनसेवा केवल दफ्तरों और सरकारी बैठकों तक सीमित नहीं होती। कभी-कभी किसी छात्र के कमरे में पहुंचकर उसे पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना भी बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के बराबर होता है।


एक जरूरी बात.


वर्दी का रुतबा अपनी जगह, लेकिन बच्चों के बीच शिक्षक बनकर खड़े होने का यह अंदाज सचमुच शाबाशी का हकदार है।


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