रायपुर। खुदाई में मिला पुराना सोना बताकर लोगों को लाखों रुपये की चपत लगाने वाले एक अंतर्राज्यीय ठग गिरोह का रायपुर कमिश्नरेट ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के सदस्य पहले असली सोने का छोटा सैंपल दिखाकर पीड़ितों का भरोसा जीतते थे, फिर पीतल के हार को सोना बताकर बेच देते थे। पुलिस ने तीन अलग-अलग मामलों में 22.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी शंभू राय समेत दो महिला आरोपियों को मुंबई से गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में देशभर के कई राज्यों में करोड़ों रुपये की ठगी की आशंका जताई गई है।

पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला, पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) रॉबिन्सन गुरिया और पुलिस उपायुक्त (मध्य) तारकेश्वर पटेल के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा संबंधित थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। यह गिरोह न्यू राजेंद्र नगर थाना, तेलीबांधा और डी.डी. नगर क्षेत्र में हुई तीन बड़ी ठगी की घटनाओं में शामिल था।

असली सोने का सैंपल दिखाकर खेलते थे ठगी का खेल
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी शंभू राय घूम-घूमकर स्टोन (राशि पत्थर) बेचने का काम करता था और इसी दौरान अपने शिकार चुनता था। आरोपी खुद को दिहाड़ी मजदूर या खुदाई करने वाला व्यक्ति बताकर लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद दावा करते थे कि खुदाई में उन्हें पुराने समय के सोने के आभूषण और सिक्के मिले हैं।
पीड़ित को भरोसे में लेने के लिए वे भारी पीतल का हार दिखाते थे। यदि कोई जांच कराने की बात करता, तो आरोपी उसी हार से पहले से तैयार रखा गया असली सोने का छोटा टुकड़ा तोड़कर दे देते थे। जांच में वह टुकड़ा असली निकलने पर पीड़ित पूरी तरह उनके झांसे में आ जाता था। इसके बाद आरोपी आर्थिक मजबूरी, बहन या बेटी की शादी जैसे भावनात्मक कारण बताकर पूरा हार कम कीमत में बेचने का लालच देते थे और लाखों रुपये लेकर नकली पीतल का हार थमा देते थे। बाद में जब पीड़ित पूरे आभूषण की जांच कराता था, तब पता चलता था कि वह पूरी तरह पीतल का है और आरोपी मोबाइल बंद कर फरार हो चुके होते थे। इसी सुनियोजित तरीके से गिरोह देश के विभिन्न राज्यों में लोगों को करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का शिकार बनाता रहा।



