उपभोक्ताओं के मोबाइल पर OTP और सब्सिडी का मैसेज, लेकिन घर तक सिलेंडर नहीं पहुंच रहा

खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के नाम पर फर्जीवाड़े करने की आशंका से हड़कंप मच गया है। यह मामला बाजार आतरिया क्षेत्र में स्थित साल्हेकला इंडियन गैस एजेंसी से जुड़ा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसी कर्मचारी पहले उनसे OTP की मांग करते हैं। OTP बताने के बाद सिस्टम में सिलेंडर डिलीवर तो दिख जाता है, लेकिन कई-कई दिन गुजर जाने के बाद भी गैस सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचता।

उपभोक्ताओं ने क्या दावा किया

ग्रामीणों के मुताबिक, रिकॉर्ड में सप्लाई पूरी दिखने के कारण उनके खातों में सब्सिडी का पैसा भी पहुंच जाता है। यानी सरकारी पोर्टल में सबकुछ सही नजर आता है, लेकिन वे खाली सिलेंडर लेकर गैस का इंतजार करते रह जाते हैं। कई उपभोक्ताओं ने दावा किया है कि दो-दो और तीन-तीन बार सब्सिडी खाते में आई, लेकिन सिलेंडर कभी नहीं मिला।


फर्जी डिलीवरी दिखाने का आरोप

पूरे मामले ने गैस वितरण व्यवस्था और विभागीय निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्योंकि ओटीपी आधारित डिलीवरी सिस्टम को सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए लागू किया था, लेकिन अब उसी सिस्टम के जरिए कथित तौर पर फर्जी डिलीवरी दिखाने का खेल होने का आरोप लग रहा है।

टाल दी जाती है शिकायत

उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत करने पर एजेंसी हर बार नया बहाना देती है। कभी कहा जाता है कि गाड़ी रास्ते में है, कभी अगले दिन सप्लाई का भरोसा दिया जाता है, तो कभी लोडिंग नहीं होने की बात कहकर लोगों को टाल दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो मामला सिर्फ फर्जी एंट्री तक सीमित नहीं है।

उपभोक्ताओं ने जताई बड़ी आशंका

आरोप यह भी हैं कि उपभोक्ताओं के नाम पर बुक किए गए घरेलू सिलेंडरों को कमर्शियल उपयोग में खपाया जा रहा है। होटल, ढाबों और छोटे व्यवसायों में घरेलू गैस बेचकर ज्यादा मुनाफा कमाने की आशंका जताई जा रही है। यही वजह है कि गरीब उपभोक्ताओं के हिस्से की गैस रिकॉर्ड में तो उन्हें मिल जाती है, लेकिन उनके घर तक नहीं पहुंचती।

800 से 900 परिवारों के प्रभावित होने की आशंका

साल्हेकला एजेंसी सीमावर्ती क्षेत्र में होने के कारण यहां खैरागढ़ के अलावा बेमेतरा और दुर्ग जिले के भी सैकड़ों उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि 800 से 900 परिवार इस कथित गड़बड़ी से प्रभावित हो सकते हैं। अगर डिलीवरी रिकॉर्ड, ओटीपी एंट्री, वाहन मूवमेंट और वास्तविक वितरण की तकनीकी जांच हो जाए तो बड़ा खुलासा सामने आ सकता है।

एडीएम ने दिए जांच के निर्देष

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि बिना गैस दिए डिलीवरी पूरी कैसे दिख गई? अगर उपभोक्ता के घर सिलेंडर पहुंचा ही नहीं तो सब्सिडी किस आधार पर जारी हुई? क्या विभाग सिर्फ सिस्टम में डिलीवर दिखने भर से संतुष्ट हो जाता है? बहरहाल जिम्मेदार अधिकारी कैमरे पर इस मामले में कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं, लेकिन खैरागढ़ एडीएम सुरेंद्र कुमार ठाकुर ने जांच के निर्देश दिए जाने की बात कही है।





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