• पूर्व विधायक शैलेष पांडेय बोले— ढाई साल में एक भी सवाल नहीं पूछा, स्मार्ट सिटी से लेकर जलभराव, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था तक सरकार को घेरा.
बिलासपुर. शहर के जनहित के मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने बुधवार को भाजपा और बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने विधानसभा में बिलासपुर की अनदेखी का आरोप लगाते हुए दावा किया कि मौजूदा विधायक अमर अग्रवाल ने पिछले ढाई वर्षों में विधानसभा में एक भी प्रश्न नहीं पूछा। उन्होंने कहा कि यदि विधायक जनता की आवाज़ सदन तक पहुंचाने में असफल रहे हैं तो उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देकर नया जनादेश लेना चाहिए।
पत्रकार वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी, नेता प्रतिपक्ष भरत कश्यप और उपनेता प्रतिपक्ष रामा बघेल भी मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ गठन के बाद करीब 23 वर्षों तक बिलासपुर का नेतृत्व अमर अग्रवाल के हाथों में रहा और वे 15 वर्षों तक मंत्री भी रहे, लेकिन इसके बावजूद शहर आज भी जलभराव, जर्जर सड़कें, पेयजल संकट, बिजली कटौती, अपराध, नशाखोरी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है।
पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने विधानसभा के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि जहां उनके कार्यकाल में बिलासपुर से जुड़े 392 प्रश्न सदन में उठाए गए, वहीं वर्तमान विधायक के खाते में पिछले ढाई वर्षों में प्रश्नों की संख्या शून्य है। उन्होंने सवाल किया कि जब दूसरे विधायक अपने क्षेत्रों के मुद्दे मजबूती से उठा रहे हैं तो बिलासपुर की आवाज़ आखिर विधानसभा में क्यों नहीं सुनाई दे रही।
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स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि करीब 1100 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पहली ही बारिश में शहर जलमग्न हो गया। कई घरों में पानी घुसने से लोगों का सामान, जरूरी दस्तावेज और छात्रों की मार्कशीट तक खराब हो गईं, लेकिन सरकार ने मात्र छह हजार रुपये की सहायता देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली। कांग्रेस ने वास्तविक नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा देने और स्मार्ट सिटी के कार्यों, विशेषकर जतिया तालाब समेत अन्य परियोजनाओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि जलभराव के दौरान पार्टी कार्यकर्ता प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और भोजन पहुंचा रहे थे, जबकि स्थानीय विधायक जनता के बीच नजर नहीं आए। नेताओं ने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को सरकार और विधानसभा तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना भी है।
पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी ने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था, रेलवे ट्रेनों की निरस्ती, बिलासपुर से हवाई सेवाओं की कमी, बढ़ी बिजली दरों, निजी स्कूलों की मनमानी फीस, स्वामी आत्मानंद स्कूलों की स्थिति और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को भी सरकार की विफलता बताया। वहीं केंद्रीय विश्वविद्यालय की एलएलबी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई गई।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि बिलासपुर के विकास और जनता के अधिकारों के लिए है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनहित के मुद्दों की अनदेखी जारी रही तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन को और तेज करेगी।



