जानिए, पंडित अनिल पाण्डेय के विशेष पंचांग से मकर संक्रांति का पुण्यकाल - महापुण्यकाल.

🔴मकर संक्रांति (सौम्यायन)विशेषांक🔴


दिनांक 14 जनवरी 2025 दिन - बुधवार को! बिलासपुर स्थानीय समय अनुसार साम के 15 बजकर 13 मिनट पर सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करेंगे अत: यह ही संक्रांति का संचरण काल है!

🔴 संक्रान्तिकाल का पंचांग - 🔴

मास-माघ, पक्ष-कृष्ण, तिथि- एकादशी दिन-बुधवार, नक्षत्र-अनुराधा, योग-गण्ड, करण-बालव, लग्न - वृषभ!


🔴 संक्रान्ति विशेषता 🔴


🔸स्थिति - बैठी,

🔸फल - मध्यम्,

🔸वाहन - बाघ,

🔸उपवाहन - अश्व,

🔸फल - भय,

🔸वस्त्र - पीला,

🔸शस्त्र - गदा,

🔸पात्र - चांदी,

🔸भक्ष्य - दूध,

🔸लेपन - केसर,

🔸जाति - भूत,

🔸पुष्प - चमेली,

🔸वस्त्र - पर्ण,

🔸अवस्था - कुमारी,

🔸जगल्लग्न - वृषभ,

🔸संक्रान्ति मुँख - दक्षिण दिशा में मुँख,

🔸दृष्टि - ईशानकोण में,

🔸संक्रान्ति गमन - पश्चिम दिशा में,

🔸संक्रान्ति का नाम - मंदाकिनी,


🔴 संक्रांति का पुण्यकाल 🔴


संक्रान्ति का जो सबसे महत्वपूर्ण पक्ष होता है वह होता है उस संक्रांति का पुण्यकाल! जिसका निर्धारण व कालज्ञान होना अति आवश्यक हैं! क्योंकि यही वह समय होता है जिसमें स्नान-दान, जाप आदि कर्म का कई गुना अधिक प्रभाव व फल प्राप्त होता है! शास्त्र का मत है कि -


*"अह:सङ्क्रमणे पुण्यमह: सर्वं प्रकीर्तितम्!"*

*"रात्रो सङ्क्रमणे पुण्यों दिनार्धं स्नानदानयो:!!"*

*"तस्मात् मुनीन्द्रै: सङ्क्रान्तेरर्वाक् षोडशनाडिका:!"*

*"पश्चात् षोडश संप्रोक्ता सथूला: पुण्यतमास्तथा!!"'*


सूर्य के अयन संक्रांति अर्थात कर्क और मकर संक्रांति को छोड़कर बाकी की सभी संक्रांति काल के 16 घड़ी पहले व 16 घड़ी बाद का समय पुण्यकाल माना जाता है परन्तु जब अयन संक्रांति हो तो मकर की संक्रान्ति के 20 घड़ी पहले से (8 घंटा) लेकर 40 घड़ी (16 घंटा) आगे की पुण्यकाल होता है ! अत: मकर की सौम्यायन संक्रांति काल शाम को 15 बजकर 07 मिनट से 20 घड़ी आगे का समय अर्थात 15:07 से लेकर 15 जनवरी प्रात: 07:13 से 16 घंटा आगे तक समय संक्रान्ति का पुण्यकाल माना जायेगा! संक्रांति के पुण्यकाल में स्नान-दान, जप आदि करना सर्वथा श्रेष्ठ फलदायी रहेगा!


🔴 संक्रान्ति का महापुण्यकाल 🔴

इस संक्रान्ति का सबसे मुख्य और विशेष समय जिसे महापुण्यकाल कहा जाता है वह - प्रात: 15:13 से 16:58 तक रहेगा!


🔴 नोट 🔴 शास्त्र का मत है कि -


*यदास्तमनवेलायां मकरं याति भास्कर:!*

*प्रदोषे चार्घरात्रे वा स्नानं दानं परेहनि!!*


अर्थात - यदि मकर की संक्रांति प्रदोषकाल, सायंकाल, रात्रिकाल में हो तो उसके अगले सम्पूर्ण दिन ही पुण्यकाल होता है! अत: संक्रान्ति का पर्व अगले दिन ही मनाना चाहिए, क्योकि संध्या काल में प्रदोष काल में और रात्रि काल में स्नान और दान करने से हानि होता है!!


चुंकि यह मकर संक्रान्ति बुघवार को एकादशी तिथि में दोपहर के बाद हो रही है और पुण्य का भी दूसरे दिन गुरुवार को प्रात: 07:13 मिनट तक है! अत: मकरसंक्रान्ति का पर्व गुरुवार दिनांक 15 जनवरी 2026 को मनाया जाना ही शास्त्र संवत और उचित है, क्योकि मकर संक्रान्ति में खिचड़ी का खाना तथा दान देना अतिशुभ माना जाता है, परन्तु एकादशी तिथि को चावल खाना अनुचित, रोगकारक, दुर्भाग्य और दरिद्रता को बढाने वाला माना जाता है ! ऐसे में गुरुवार अर्थात 15 जनवरी को ही मकर संक्रान्ति मनाया जाना चाहिए!







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