शिक्षा व्यवस्था चौपट,सरकार झूठ बोल रही है विधानसभा में या 37000 पद खत्म कर दिए ?- शैलेश.

बिलासपुर. युक्तियुक्तकरण के नाम पर साय सरकार ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को चौपट कर दिया है। पूर्व विधायक शैलेश पाण्डेय ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षकों का सेट अप कम करने से वैज्ञानिक मापदंड के अनुसार स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक भर्ती इस सरकार में कभी नहीं हो पाएगी, जिससे स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता निरंतर बदहाल होती जाएगी।




श्री पाण्डेय ने गिनाई ये खामियां.


वर्ष 2025 के बजट सत्र में मार्च माह में सरकार ने कांग्रेस विधायक के सवाल पर जवाब दिया था कि, प्रदेश में शिक्षकों के 63053 पद रिक्त हैं।


उसके बाद जून 2025 में सरकार ने शिक्षकों और स्कूलों का युक्तियुक्तकरण (Rationalization) किया।


जुलाई 2025 में मानसून सत्र में कांग्रेस विधायक द्वारा फिर से पूछे गए शिक्षकों के रिक्त पदों के सवाल का जवाब मिला कि, प्रदेश में शिक्षकों के 25,907 पद रिक्त हैं।


अब सवाल यह उठता है कि, जब इस बीच नई भर्तियां नहीं हुईं तो फिर शिक्षकों के 37,146 पद कहां गए।


इसका सीधा मतलब है कि 37146 पद समाप्त कर दिए गए। मतलब इतने युवाओं की नौकरी का रास्ता हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।


पदों को खत्म ऐसे किया गया। जैसे कि वर्ष 2008 के सेटअप के अनुसार प्रायमरी स्कूलों में 1+2 मतलब 1 प्रधान पाठक और 2 सहायक शिक्षक होने चाहिए थे। लेकिन उसे 1+1 करके प्रदेश के 30700 प्रायमरी स्कूलों में 30700 पद समाप्त कर दिए गए। इसी तरह मिडिल स्कूलों में 2008 का सेटअप 1+4 था। जिसे 1+3 कर दिए जाने से प्रदेश के 13011 मिडिल स्कूलों में 13011 पद समाप्त कर दिए गए। इसी तरह से व्याख्याताओं के अनुपात में भी कमी किया गया है। जिससे लगभग 50000 शिक्षकों के पद छत्तीसगढ़ में समाप्त कर दिए गए हैं। मतलब इतनी संख्या में युवाओं को नौकरी से वंचित कर दिया गया है।


जबकि भाजपा ने मोदी की गारंटी के नाम से जारी घोषणापत्र में 57000 शिक्षकों की भर्ती का वायदा किया था। लेकिन किया उल्टा काम।


अब सरकार मात्र 5000 पदों पर भर्ती कर रही है, जो कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और TET परीक्षा पास किए हुए लाखों बेरोजगारों के साथ अन्याय है, धोखा है।





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