• भू-माफिया से होटल कारोबारी तक,अब माननीय से ‘नजदीकी’ का कथित रौब.
• कल तक सीधे मुंह बात नहीं, आज हाथ में हाथ डालकर रिश्ते की नुमाइश?
•शहर में होटल कारोबारी के बदलते तेवर चर्चा में.
बिलासपुर . शहर में होटल से लेकर जमीन खरीदी बिक्री के व्यवसाय से अपना सूर्या चक्र चलाने वाले एक कथित कारोबारी के बदलते तेवर इन दिनों नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक काले कोर्ट वाले माननीय से पुरानी पहचान को अब कारोबारी अपनी प्रतिष्ठा और प्रभाव के प्रदर्शन के तौर पर इस्तेमाल कर जूठी और बे रंग दोस्ती का दमखम भरने की कोशिश कर रहा है।
यहां से होती है बे रंग दोस्ती की शुरुआत.
बताया जाता है कि जिस दौर में उक्त माननीय वकालत के दम पर में शहर में रहते थे, उस समय उनका निवास कारोबारी के घर के सामने स्थित अपार्टमेंट में था। कारोबारी और माननीय की उस समय की पहचान को लेकर अब तरह-तरह की चर्चाएं शहर में चल रही हैं। हालांकि उस दौर में कारोबारी के व्यवहार और आज के कथित व्यवहार में जमीन-आसमान का अंतर होने की बातें भी कही जा रही हैं।
कल तक ‘सुपीरियर’ अंदाज, अब रिश्तेदारी का प्रदर्शन?
शहर में चर्चा है कि कारोबारी का रवैया उस समय बेहद अलग था। आरोप है कि वह खुद को बेहद प्रभावशाली समझते हुए आम लोगों से ही नहीं, बल्कि परिचितों से भी सीधे मुंह बात करने से बचता था।
लेकिन अब तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है। माननीय का बढ़ते कद के साथ बिलासपुर के बड़े न्याय के मंदिर में पदस्थापना होते ही कथित तौर पर कारोबारी उनके साथ अपनी नजदीकी को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की जुगत में लगा हुआ है। यही बदलाव शहर में सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर अचानक यह ‘यू-टर्न’ क्यों?
पार्टी में ‘क्लोज रिलेशन’ की नुमाइश?
यह चर्चा तो अब आम और खास हो गई है कि एक सार्वजनिक पार्टी में कारोबारी माननीय के साथ जबरिया हाथ में हाथ डाले चलता दिखाई दिया, ताकि मौजूद लोगों के बीच अपनी कथित नजदीकी का मैसेज दे सके।
यदि यह दावा सही है तो सवाल यह उठता है कि निजी परिचय को सार्वजनिक प्रभाव के प्रदर्शन में बदलने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?
वो तो मेरा छोटा भाई,कथित दावों से बढ़ा बवाल.
चर्चित होटल से लेकर जमीन खरीदी बिक्री के व्यवसाय में अपना सूर्या चक्र चलाने वाले कारोबारी के कथित बड़बोलेपन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसके बारे में यह चर्चा है कि वह कई जगहों पर माननीय को अपना ‘छोटा भाई’ बता रहा है। इससे कुछ सालों पूर्व भी कारोबारी की प्रदेश के एक काफी सुर्खियों में रहने वाले सीनियर आईपीएस के साथ कथित भी रही है जिसका फायदा बीते सालों में कारोबारी ने खूब उठाया था।
इतना ही नहीं, कथित तौर पर वह यह दावा भी करता रहा है कि बड़े भाई के सम्मान में माननीय उसका पैर छूते हैं। कारोबारी द्वारा इस तरह की बातें अलग-अलग जगहों पर कहे जाने की चर्चा अब शहर के सामाजिक और कारोबारी हलकों में सवालों का विषय बन गई है।
रिश्ता निजी है तो फिर ‘रौब’ सार्वजनिक क्यों?
चर्चा के बीच यह बात भी सामने आ रही है कि पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी व्यक्ति की प्रोटोकॉल वाले माननीय से पुरानी व्यक्तिगत पहचान है, तो उसे लेकर सार्वजनिक मंचों पर प्रभाव जमाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
कानून और न्याय व्यवस्था में पद की गरिमा सर्वोपरि होती है। ऐसे में किसी माननीय से निजी परिचय होने का दावा यदि किसी कारोबारी द्वारा अपने प्रभाव या पहुंच के प्रदर्शन के लिए किया जाता है, तो यह निश्चित रूप से गंभीर सवाल खड़े करता है।
फिलहाल पूरा मामला शहर की चर्चाओं और कारोबारी के बताए जा रहे कथित दावों के इर्द-गिर्द है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। यदि कारोबारी वास्तव में किसी माननीय के नाम या कथित नजदीकी का इस्तेमाल अपने व्यावसायिक अथवा जमीन संबंधी हित साधने के लिए कर रहा है तो यह अलग स्तर का गंभीर विषय होगा।
