रायपुर। छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ को बड़ा झटका लगा है। सामान्य प्रशासन विभाग ने स्थापना शाखा में लंबे समय से पदस्थ उप सचिव अंशिका ऋषि पाण्डेय के खिलाफ गंभीर आरोपों के साथ प्रस्तुत किए गए ज्ञापनों को दरकिनार करते हुए इस पूरे प्रकरण को नस्तीबद्ध (बंद) कर दिया है।
दरअसल, छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने 23 जून पत्र और उसके बाद 22 जुलाई को स्मरण-पत्र के माध्यम से मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। संघ का आरोप था कि अंशिका पाण्डेय पिछले 5 वर्षों से भी अधिक समय से एक संवेदनशील सीट पर जमी हुई हैं, जो कि सामान्य प्रशासन विभाग के ही स्थानांतरण नियमों (3 वर्ष की अधिकतम अवधि) का खुला उल्लंघन है।
संघ ने अपने ज्ञापनों में अंशिका पांडेय पर पर गंभीर आरोप लगाए थे. कर्मचारी संघ का दावा है कि उनके पास इन सभी आरोपों के संबंध में अत्यंत पुख्ता और प्रामाणिक साक्ष्य मौजूद थे, जिन्हें प्रस्तुत करने के लिए वे तैयार थे। परंतु राज्य में लागू सुशासन व्यवस्था को दरकिनार करते हुए, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा संघ से इन साक्ष्यों को लिए बिना ही मामले को रफा-दफा कर दिया गया।

सरकार द्वारा की गई इस एकतरफा कार्रवाई से मंत्रालयीन कर्मचारियों के मध्य भारी असंतोष और निराशा का माहौल है। कर्मचारियों का मानना है कि प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता की बात करने वाली शासन व्यवस्था में इस प्रकार से शिकायत को दबाना सुशासन की दावों की पोल खोलता है।



