धरमजयगढ़. रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से प्रधानमंत्री आवास योजना में मनरेगा मजदूरी भुगतान को लेकर बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. मनरेगा कार्यों के सोशल ऑडिट के दौरान जब इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ, तो ग्रामसभा की बैठक में जमकर हंगामा मच गया. आक्रोशित हितग्राहियों ने आरोप लगाया कि पसीना उन्होंने बहाया, जबकि मजदूरी की राशि कागजों में फर्जी हाजिरी चढ़ाकर किसी और के नाम पर आहरित कर ली गई.

रिपोर्ट आने के बाद मचा बवाल
धरमजयगढ़ क्षेत्र में आयोजित ग्रामसभा में मनरेगा कार्यों के सोशल ऑडिट की रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही हंगामा खड़ा हो गया. प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मनरेगा में काम करने वाले हितग्राहियों के भुगतान में गंभीर वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है.
ग्रामसभा में मौजूद कई हितग्राहियों ने मजदूरी भुगतान को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उनका कहना है कि पति-पत्नी ने मिलकर निर्माण कार्य पूरा किया, ताकि मजदूरी का पैसा उनके परिवार को मिल सके. लेकिन रिकॉर्ड सामने आने पर पता चला कि मस्टर रोल में उनका नाम ही गायब था और उनके आवास के बदले किसी तीसरे व्यक्ति की हाजिरी दर्ज कर मजदूरी की राशि निकाल ली गई. वहीं जवाब मांगने पर सरपंच और रोजगार सहायक स्पष्ट जवाब देने के बजाय अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए एक-दूसरे पर दोषारोपण करते नजर आए.
करीब 26 हितग्राहियों के नाम पर खेल, 1.30 लाख से ज्यादा की रिकवरी तय
ऑडिट के प्राथमिक आंकड़ों के अनुसार, करीब 25 से 26 हितग्राहियों के मकान निर्माण में इस तरह का फर्जीवाड़ा सामने आया है. फर्जी नामों पर हाजिरी दर्ज कर लगभग 1 लाख 30 हजार रुपये से अधिक की सरकारी राशि का गबन किया गया है.
पूरा रिकॉर्ड है मौजूद
रोजगार सहायक नीतीश सारथी ने खुद का बचाव करते हुए दावा किया कि उनके पास सभी दस्तावेज हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि वे मस्टर रोल पर सरपंच के हस्ताक्षर नहीं कराते थे. वहीं जब उनसे यह पूछा गया कि बिना काम किए बाहरी लोगों को भुगतान कैसे हो गया, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि जिनका भी भुगतान हुआ है, उसका पूरा रिकॉर्ड मौजूद है.
मुझे कोई जानकारी नहीं : सरंपच
मासाझार पंचायत के सरपंच नंदकुमार राठिया ने मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया. उन्होंने बताया कि यह विशेष ग्रामसभा मनरेगा कार्यों के सोशल ऑडिट को लेकर बुलाई गई थी. आवास हितग्राहियों की मजदूरी का पैसा किसी अन्य खाते में कैसे चला गया, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है. सरपंच ने स्पष्ट किया कि पंचायत स्तर पर ऐसा कोई मस्टर रोल नहीं भरा गया, उन्होंने सिर्फ भूमि समतलीकरण के मस्टर रोल पर दस्तखत किए थे. उनका कहना है कि पीएम आवास का मस्टर रोल ऑनलाइन जारी होता है और इस प्रक्रिया को लेकर कोई भी अधिकारी उनसे संपर्क नहीं करता.
