पश्चिम बंगाल की सत्ता पर 15 साल एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी के लिए आजकल दिन थोड़े बुरे चल रहे हैं. खून पसीने से सींचकर उन्होंने जिस पार्टी को खड़ा किया उसका चुनाव चिन्ह चुनाव आयोग ने फ्रिज कर दिया है. इसकी जगह उन्हें नया चुनाव चिन्ह फ़ुटबाल प्लेयर दे दिया गया है. यह झटका कम था जो अब उन्हें एक और बड़ा झटका लगा है. दरअसल, नंदीग्राम में ममता ने जिस संचिता प्रधान को उम्मीदवार घोषित किया था. उसने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद इस चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया है.

ममता बनर्जी के लिए 24 घंटे के भीतर यह दूसरा झटका माना जा रहा है. शुक्रवार को संचिता प्रधान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मिलने नबान्न (सचिवालय) पहुंची थीं. कुछ ही दिन पहले संचिता को नंदीग्राम सीट से उम्मीदवार घोषित किया गया थ
शुभेंदु का गढ़ माना जाता है नंदीग्राम
2021 में नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी मैदान में उतरे थे. शुभेंदु को मात देने के लिए ममता ने यहां से पर्चा दाखिल किया था. हालांकि, ममता बनर्जी इस सीट से चुनाव हार गई. शुभेंदु नेता प्रतिपक्ष बनाए गए. 2026 के चुनाव में शुभेंदु फिर यहां से मैदान में उतरे.
2026 में भवानीपुर के साथ यहां से भी शुभेंदु को जीत मिली. शुभेंदु ने नंदीग्राम सीट छोड़ दी. यहां से बीजेपी ने शुभेंदु के पूर्व पीए (PA) चंद्रनाथ रथ की मां हासिरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है. चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद चंद्रनाथ की हत्या कर दी गई थी.
6 अक्टूबर को उपचुनाव, 9 को रिजल्ट
चुनाव आयोग के मुताबिक नंदीग्राम सीट पर अगर चुनाव होता है तो 6 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा. 9 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी. 16 सितंबर को यहां नामांकन की आखिरी तारीख थी. ऋतब्रता गुट ने यहां से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था. वहीं कांग्रेस के सिंबल पर मिलन प्रधान यहां से उम्मीदवार हैं. सीपीआई ने गोपाल गिरी को मैदान में उतारा है.
ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 19 सांसद बचे
टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं. अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं. राज्यसभा की बात करें तो 13 में से दो सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 11 राज्यसभा सांसद बचे हैं. विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीतीं थीं. जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं.ा.
