मुंगेली. मुंगेली जिले के नगर पंचायत जरहागांव निवासी सर्पमित्र सुरेंद्र कुमार के वर्षों से किए जा रहे निःस्वार्थ सर्प रेस्क्यू कार्य को जिला प्रशासन ने स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर सम्मानित किया. लल्लूराम डॉट कॉम ने सुरेंद्र की जनसेवा और जोखिम भरे सर्प रेस्क्यू कार्य को प्रमुखता से सामने लाते हुए उनकी समस्याओं और आवश्यक संसाधनों की जरूरत को लेकर खबर प्रकाशित की थी. खबर का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर कुन्दन कुमार ने उनके सेवा कार्य को सराहा और 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित जिला स्तरीय मुख्य समारोह में उन्हें सम्मानित किया. सम्मान पत्र कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक पुन्नूलाल मोहले के हाथों दिया गया.

बता दे कि मुख्य अतिथि विधायक पुन्नूलाल मोहले ने 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शासन की योजनाओं एवं कार्यक्रमों में बेहतर कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को सम्मानित किया. उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया और उनका उत्साहवर्धन किया. इसमें समाज सेवा करने वाले इस सर्प मित्र को भी सम्मानित किया गया.

जानिए क्या है सेवा कार्य
सुरेंद्र कश्यप पिछले करीब 15 वर्षों से लोगों की जान बचाने के साथ-साथ सांपों को भी सुरक्षित रखने का काम कर रहे हैं. अब तक वे 500 से अधिक जहरीले और गैर-जहरीले सांपों का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक स्थानों पर छोड़ चुके हैं. जरहागांव सहित आसपास के गांवों में घर, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और सरकारी कार्यालयों में सांप निकलने की सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू करते रहे हैं.
खबर में सामने आई थी बिना संसाधनों के सेवा की कहानी
media ने अपनी खबर में यह प्रमुखता से बताया था कि इतने वर्षों से सर्प रेस्क्यू का काम करने के बावजूद सुरेंद्र कश्यप के पास आवश्यक सर्प रेस्क्यू किट और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं थे. इसके बावजूद वे अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए लगातार काम करते आ रहे हैं.
स्थानीयसमाचार

खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन का ध्यान उनके कार्य की ओर आकर्षित हुआ. स्वतंत्रता दिवस के जिला स्तरीय मुख्य समारोह में उनके सेवा कार्य को सम्मानित किया जाना इस बात का उदाहरण है कि जमीनी स्तर पर निःस्वार्थ भाव से किए जा रहे कार्यों को प्रशासन ने पहचान दी है.
जिंदा सांप लेकर पहुंचे थे अस्पताल

सुरेंद्र कश्यप के सर्प रेस्क्यू कार्य से जुड़ा एक मामला बेहद खास रहा. एक महिला को सांप ने काट लिया था और जिला अस्पताल में चिकित्सकों को यह स्पष्ट नहीं था कि किस प्रजाति के सांप ने काटा है. ऐसे समय में सुरेंद्र ने उसी सांप को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया और उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे. चिकित्सकों को सांप दिखाए जाने से इलाज में मदद मिली. इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्र और स्कूल परिसर में एक साथ कई सांपों के मिलने पर भी उन्होंने तत्काल रेस्क्यू कर बच्चों और लोगों को संभावित खतरे से बचाया.
सम्मान से बढ़ा सर्पमित्र का हौसला
सम्मानित करने के लिए सुरेंद्र कश्यप ने जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया. उनका कहना है कि वे यह काम किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि इंसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा और आत्मिक संतुष्टि के लिए करते हैं. वहीं इस सम्मान के बाद क्षेत्र के लोगों ने भी खुशी जताई है. लोगों का कहना है कि लंबे समय से निःस्वार्थ सेवा कर रहे सुरेंद्र कश्यप को प्रशासन द्वारा सम्मानित किया जाना अन्य लोगों को भी जनसेवा के लिए प्रेरित करेगा.
media की खबर के बाद मिला सम्मान
सुरेंद्र कश्यप के सम्मान को जमीनी स्तर पर की गई पत्रकारिता और जनहित के मुद्दे को सामने लाने के सकारात्मक परिणाम के तौर पर भी देखा जा रहा है. media ने उनके कार्य को केवल सर्प रेस्क्यू की खबर के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की कहानी के रूप में सामने रखा था, जो सीमित संसाधनों के बावजूद वर्षों से इंसानों और वन्यजीवों की जान बचाने में जुटा है. खबर का संज्ञान लेकर जिला प्रशासन द्वारा उन्हें स्वतंत्रता दिवस के जिला स्तरीय मुख्य समारोह में सम्मानित किया जाना न केवल सुरेंद्र कश्यप के सेवा कार्यों की पहचान है, बल्कि जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाने वाली पत्रकारिता के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है.
