बारिश बनी मुसीबत: नदी-नाले उफान पर, भूस्खलन के डर से अरनपुर–जगरगुंडा सड़क बंद… सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, नक्सली स्मारक ध्वस्त; जंगल पर हाईटेक नजर

बस्तर: सावन की शुरुआत से ठीक पहले बस्तर में मानसून ने पूरी ताकत दिखानी शुरू कर दी है। लगातार हो रही बारिश से जिले का मौसम पूरी तरह बदल गया है। नदी-नाले उफान पर हैं और कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने लगा है। खराब मौसम का असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा, जिसके चलते जगदलपुर से रायपुर और हैदराबाद की उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। दूसरी ओर चित्रकोट जलप्रपात का रौद्र और मनमोहक रूप पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।


मौसम विभाग ने अगले 72 घंटे तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई है। हालांकि एक दिन बारिश की तीव्रता थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन इसके बाद फिर तेज वर्षा के संकेत हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की है। किसानों के लिए यह बारिश राहत लेकर आई है, जबकि प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।



पहाड़ बना खतरा, भूस्खलन के डर से अरनपुर-जगरगुंडा मार्ग 48 घंटे बंद

दंतेवाड़ा: लगातार बारिश के बीच दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। अरनपुर-जगरगुंडा घाटी मार्ग पर भूस्खलन की आशंका के चलते अगले 48 घंटे के लिए आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। हाल ही में हुए लैंडस्लाइड के बाद अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया, जहां अब भी पहाड़ी से मिट्टी का रिसाव जारी मिला। सड़क किनारे की जमीन भी कमजोर हो चुकी है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।


बारिश के कारण कई स्थानों पर पेड़ गिरने का खतरा भी बना हुआ है। प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग अपनाने और प्रतिबंध का पालन करने की अपील की है। लगातार निगरानी रखी जा रही है और मौसम सामान्य होने के बाद ही मार्ग खोलने पर निर्णय लिया जाएगा। उद्देश्य केवल एक है किसी भी जनहानि को रोकना।


उफनाई नारंगी नदी, पुल डूबा, कोंडागांव-नारायणपुर मार्ग पर आवागमन बंद

कोंडागांव जिले में लगातार बारिश का असर अब सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है। नारंगी नदी का जलस्तर बढ़ने से पुल के ऊपर पानी बहने लगा, जिसके बाद प्रशासन ने कोंडागांव-नारायणपुर मुख्य मार्ग को एहतियातन बंद कर दिया। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और दोनों ओर बैरिकेडिंग कर रास्ता सील कर दिया गया।


अधिकारियों ने लोगों से किसी भी हालत में पुल पार करने की कोशिश नहीं करने की अपील की है। जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रखा गया है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता। हालात सामान्य होने तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा।


नक्सली प्रभाव मिटाने की मुहिम तेज, सुरक्षा बलों ने ध्वस्त किया नक्सली स्मारक

नारायणपुर जिले में नक्सल प्रभाव खत्म करने की दिशा में सुरक्षा बलों ने एक और महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। धनोरा क्षेत्र के तोयापारा गांव में संयुक्त सर्च अभियान के दौरान नक्सलियों द्वारा बनाया गया लकड़ी का स्मारक ध्वस्त कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि ऐसे स्मारक नक्सली संगठन अपने प्रभाव और प्रचार के लिए तैयार करते हैं। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में गहन तलाशी अभियान भी चलाया गया।

अधिकारियों ने कहा कि अब नक्सल मुक्त क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था लगातार मजबूत की जा रही है। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। सुरक्षा बलों का मानना है कि विकास और विश्वास के जरिए ही क्षेत्र को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाया जा सकता है।


कानून व्यवस्था और जंगल दोनों पर हाईटेक नजर

जगदलपुर: बस्तर जिले में प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में दो बड़े कदम उठाए गए हैं। कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 13 निरीक्षकों की नई पदस्थापना की गई है, ताकि पुलिसिंग और अधिक प्रभावी हो सके। वहीं जंगलों में वन्यजीवों के शिकार और अवैध कटाई पर रोक लगाने के लिए वन विभाग ने पहली बार थर्मल इमेजिंग ड्रोन से रात्रिकालीन निगरानी शुरू कर दी है।

यह ड्रोन घने अंधेरे में भी इंसानों और वन्यजीवों की गतिविधियों का पता लगाने में सक्षम है। माचकोट और करपावंड सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में इसका सफल उपयोग किया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि इससे शिकारियों और लकड़ी तस्करों पर प्रभावी कार्रवाई आसान होगी। आधुनिक तकनीक के जरिए अब जंगलों की सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होने की उम्मीद है।


शिक्षा और पुनर्वास पर सरकार का फोकस

दंतेवाड़ा/सुकमा: दक्षिण बस्तर में एक ओर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश तेज हुई है तो दूसरी ओर पुनर्वास अभियान को नई दिशा दी जा रही है। वर्षों से कार्यालयों में संलग्न शिक्षकों को उनके मूल स्कूलों में वापस भेजा जा रहा है, जिससे स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। वहीं दंतेवाड़ा में शिक्षकों ने वीएसके एप की तकनीकी खामियों को लेकर नाराजगी जताई है और स्पष्ट किया है कि एप की गलती का खामियाजा शिक्षकों को नहीं भुगतना चाहिए।


दूसरी ओर सुकमा में आत्मसमर्पित नक्सलियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से वित्तीय साक्षरता कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें बैंकिंग, बचत, निवेश और साइबर सुरक्षा की जानकारी दी गई। संदेश साफ था कि हिंसा नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता ही भविष्य का रास्ता है। प्रशासन का मानना है कि ऐसे प्रयासों से समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।





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