यह खबर आरोपों और व्यंग्यात्मक शैली में लिखी गई है, इसलिए इसे अखबारी अंदाज में तीखी लेकिन कानूनी रूप से सुरक्षित भाषा में प्रस्तुत करना बेहतर होगा।
हेडिंग:
दो बोतल जब्त, दो पेटी अंदर! वनांचल के 'सिखाड़ी डीएसपी' की कार्रवाई पर उठे सवाल
सब हेडिंग:
ढाबे में मिली अवैध शराब, लेकिन कार्रवाई से ज्यादा चर्चा 'सेटिंग' की... मातहतों पर रौब, मैदान में अलग ही खेल!
इंट्रो:
बिलासपुर। जिले के वनांचल क्षेत्र में पदस्थ एक "सिखाड़ी डीएसपी" इन दिनों अपने कामकाज से ज्यादा कार्यशैली को लेकर चर्चाओं में हैं। स्टाफ के प्रति सख्त रवैये और वर्दी के रौब के लिए चर्चित इस अधिकारी की हालिया ढाबा जांच अब सवालों के घेरे में आ गई है। चर्चा है कि जिस कार्रवाई को अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताया गया, उसकी परतें खुलने पर कहानी कुछ और ही नजर आने लगी।
Writing
सूत्रों के मुताबिक हाल ही में देहात क्षेत्र के एक चर्चित ढाबे में डीएसपी साहब जांच करने पहुंचे। जांच के दौरान ढाबे में भोजन के साथ कथित तौर पर अवैध शराब परोसे जाने की जानकारी सामने आई। मौके पर शराब मिलने के बाद कार्रवाई का डंका तो खूब पीटा गया, लेकिन जानकारों के बीच चर्चा इस बात की है कि वास्तविक बरामदगी और कागजों में दर्ज जब्ती के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
इलाके में यह चर्चा आम है कि मौके पर मिली शराब की मात्रा कहीं अधिक थी, लेकिन कार्रवाई के दौरान महज दो बोतलों की जब्ती दर्शाई गई। वहीं आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि इस नरमी के पीछे कथित तौर पर "दो पेटी" की सेटिंग का खेल हुआ। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन पुलिस महकमे और स्थानीय हलकों में इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
उधर मातहतों के बीच भी डीएसपी साहब की कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि साहब के पास अनुशासन तो भरपूर है, लेकिन संवेदनशीलता की कमी दिखाई देती है। छोटी-छोटी बातों पर फटकार और हर वक्त रौब झाड़ने की आदत ने कई कर्मचारियों को असहज कर रखा है।
लोग चाचा चौधरी की उस सीख को याद कर रहे हैं जिसमें अनुभव और हुनर से बड़े से बड़ा खेल समझ लेने की बात कही गई थी। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां चर्चा किसी कॉमिक किरदार की नहीं, बल्कि एक ऐसे अधिकारी की हो रही है जिनकी कार्रवाई से ज्यादा उनकी कार्यशैली सवालों में है।
अब देखना यह होगा कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई की इस कहानी में सच क्या है और अफवाह क्या, लेकिन इतना तय है कि वनांचल में इन दिनों "दो बोतल जब्त, दो पेटी अंदर" वाला जुमला खूब तैर रहा है।
समापन लाइन:
यदि चर्चाओं में दम नहीं है तो विभाग को तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, और यदि आरोप सही हैं तो फिर यह मामला केवल ढाबे तक सीमित नहीं रह जाता।



