शाबास IAS शर्मा: कलेक्ट्री की ऐसी तस्वीर जिसे देख हर कोई कह रहा मानवता और संवेदनशीलता हो तो ऐसी, जनदर्शन में दिव्यांग के पास बैठ गए कलेक्टर कुलदीप शर्मा और उसकी समस्या पूछ लगे बतियाने.

•कलेक्टर ने जनदर्शन में सुनी लोगों की समस्याएं.


 • दिव्यांग हृदय केवट के ईलाज और संपत्ति विवाद सुलझाने अधिकारियों को दिए निर्देश.


बलौदाबाजार. राज्य के बलौदा बाजार जिले से युवा आईएएस के जिसे समाज में मानवता और संवेदनशीलता कहते हैं उस कलेक्ट्री की एक तस्वीर सामने आई है। सोशल मिडिया पर तैर रही इस तस्वीर में कलेक्टर जनदर्शन के दौरान दिव्यांग की समस्या सुन उसके पास बैठ बतयाते नजर आ रहे हैं।


यह तस्वीर आईएएस कुलदीप शर्मा की है। जिले के कलेक्टर ने जनदर्शन में विभिन्न ग्रामो से पहुंचे लोगों की समस्याएं सुनी। इस दौरान उन्होंने मानवता और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए एक लाचार दिव्यांग के पास जाकर उसकी गुहार सुनी और समाधान के लिये अधिकारियों को निर्देशित किया।


 तहसील टुंडरा अंतर्गत ग्राम खपरीडीह निवासी दिव्यांग हृदय केवट अपनी गंभीर बीमारियों और पारिवारिक उपेक्षा से त्रस्त होकर कलेक्टर कार्यालय आया था। हृदय केवट ने अत्यंत भावुक होकर बताया कि शारीरिक अक्षमता के कारण वे बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन उनके अपने ही परिवार के सदस्य, जिनमें उनकी माता और छोटा भाई शामिल हैं, न तो उनके इलाज में सहयोग कर रहे हैं और न ही पैतृक संपत्ति में उनका जायज हिस्सा दे रहे हैं। बेसहारा और अपनों के तिरस्कार से आहत हृदय केवट ने न्याय की उम्मीद में जनदर्शन का दरवाजा खटखटाया।


कलेक्टर श्री शर्मा ने दिव्यांग हृदय केवट के बगल में बैठकर उनके आवेदन को पढ़ा। उन्होंने न केवल उनकी बातों को धैर्यपूर्वक सुना, बल्कि तत्काल मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के आदेश दिये उन्होंने हृदय केवट के भूमि संबंधी विवाद और संपत्ति में हिस्सा दिलाने के मामले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कसडोल रामरतन दुबे को निर्देशित किया कि वे इस प्रकरण की सूक्ष्म जाँच कर पीड़ित को उनका विधिक अधिकार दिलाना सुनिश्चित करें। इसके साथ ही, हृदय केवट के स्वास्थ्य की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अवस्थी को विशेष निर्देश दिए गए कि दिव्यांग के इलाज के लिए हर संभव चिकित्सकीय सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए। कलेक्टर की इस पहल ने न केवल एक पीड़ित दिव्यांग को न्याय की उम्मीद जगाई है, बल्कि प्रशासन के मानवीय दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया है।






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