निशांत को लेकर तमाम बयानबाजी हो रही थी। माना जा रहा था कि नीतीश की विदाई के साथ ही निशांत सत्ता में दिखाई देंगे। लेकिन निशांत डिप्टी सीएम नहीं बने, आखिर क्यों?जिस दिन यह तय हुआ कि नीतीश कुमार बिहार छोड़कर दिल्ली की राह पकड़ेंगे, तभी से उनके बेटे निशांत कुमार को लेकर चर्चा तेज हो गई। जदयू समर्थकों ने तो उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए सटीक उम्मीदवार तक घोषित कर दिया। फिर चर्चा शुरू हुई कि वह उप मुख्यमंत्री बनेंगे। आखिरी क्षणों तक यही चर्चा चलती रही।
लेकिन आखिरी क्षणों में बिहार के दो डिप्टी सीएम के नाम के तौर पर विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र कुमार यादव के नाम तय हो गए।होली के बाद अचानक 5 मार्च को नीतीश ने ऐलान कर दिया कि वह राज्यसभा जाएंगे। इसके बाद से ही उनके उत्तराधिकारी को लेकर बात होनी शुरू हो गई। निशांत भी जल्द ही तस्वीर में सामने आने लगे। इसके 3 दिन बाद 8 मार्च को निशांत को जदयू की सदस्यता दिलवा दी गई। माना जाने लगा कि अब मुख्यमंत्री तो नहीं लेकिन निशांत का डिप्टी सीएम बनना तय ही है। कहा गया कि निशांत का राजनीति में आना परिवारवाद से ज्यादा पार्टी को बचाने के लिए उठाया गया कदम है। लेकिन जब सम्राट ने मुख्यमंत्री की शपथ ले ली तब निशांत गायब रहे।



