• चांटीडीह, पूर्व पार्षद पर जमीन हेरफेर कर मुनाफा कमाने के आरोप.
बिलासपुर. बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की सबसे पुरानी बस्तियों में शुमार चांटीडीह इन दिनों जमीन विवाद को लेकर सुर्खियों में है। आरोप है कि कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व पार्षद ने कथित तौर पर बीते वर्षों में ‘चिड़िया बिठाने’ के खेल के जरिए सरकारी जमीन में हेरफेर कर उसे बेचने और लाखों का मुनाफा कमाने का खेल किया। अब वही जमीन विवाद का कारण बन गई है और वर्षों से काबिज रहवासियों पर दबाव बनाने के आरोप भी पूर्व पार्षद पर लग रहे हैं।
https://youtube.com/shorts/Eu_VM1cEe60?si=ds_woyD1bDjk4GG3
इस वायरल वीडियो की 'OMG NEWS' ने पड़ताल की तो पता चला कि जमीन के सीमांकन के बीच विवाद का वीडियो बीते गुरुवार की दोपहर का है। स्थानीय लोगों की माने तो पीडब्ल्यूडी और मास्टर प्लान में चांटीडीह पुराना सब्जी मंडी रोड़ से साइंस कॉलेज तक 80 फिट धरसा की (सरकारी जमीन) जमीन के नाम पर दर्ज है। जिसे पहले कांग्रेस की टिकिट से जीते पूर्व पार्षद विष्णु यादव और अब दल बदल कर बीजेपी से वार्ड क्रमांक 55 माता परमेश्वरी से महिला पार्षद मनोरमा यादव के जेठ विष्णु यादव ने राजनीतिक रसूख का फायदा उठा कर राजस्व विभाग की मिलीभगत से सरकारी कच्ची सड़क को 60 फिट का बताकर षड्यंत्र रचने का गंभीर आरोप लग रहा है।

बताया जा रहा है कि पहले भी 80 फिट को लेकर सीमांकन की रिपोर्ट सामने आई है लेकिन विष्णु यादव सरकारी आंकड़ों को रद्दी की टोकरी में डाल अपनी मनमानी पर अड़े हुए है।
https://youtube.com/shorts/VWFsqM1a724?si=rL9hX0gIRYtxGzxA
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी दस्तावेजों में दर्ज जमीन का क्षेत्रफल कुछ और है, जबकि मौके पर पूर्व पार्षद द्वारा जमीन को अपने हिसाब से कम-ज्यादा बताकर कब्जे को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है। यही वजह है कि चांटीडीह में लंबे समय से रह रहे लोगों और पूर्व पार्षद के बीच तनातनी की स्थिति बनी हुई है।
https://youtu.be/-Fbivv42Xpo?si=cr4TSnYU89x6gJEj
हिम्मत है तो विधायक की जमीन कम कर दिखाओ.

बताया जा रहा है कि चांटीडीह पुराना सब्जी मंडी से साइंस कॉलेज तक कइयों ने अवैध कब्जा कर रखा है। बीते दिनों कांग्रेस के एक विधायक और पेशे से इंजीनियर की आदिवासी हॉस्टल के पास स्थित जमीन का नापजोख करने राजस्व विभाग की टीम पहुंची थी वहां भी 80 है कि सरकारी जमीन को कम कर 60 फिट बताने की कोशिश की गई मगर विधायकी की आगे एक न चली और पूरे सरकारी दस्तावेजों के अनुसार 80 फिट दर्ज कर सीमांकन रिपोर्ट बनाई गई है। इसे भी एक आधार बताकर चांटीडीह के रहवासियों ने राजस्व विभाग की टीम को खरी खोटी सुनाया और कहा कि अगर हिम्मत है तो विधायक की जमीन कम करके दिखाओ.
https://youtu.be/X4Hio3KRoYc?si=GRVqiahf3xEh9AqZ
सवाल : आखिर खसरा नंबर 551 में कैसे तन गई बिल्डिंग.
बीते गुरुवार को चांटीडीह की विवादित जमीन का नापजोख करने पहुंची राजस्व विभाग की टीम को पुराने रिकॉर्ड दिखाते हुए रहवासियों ने सवाल किया कि, आखिर किस हिसाब से खसरा नंबर 551 में किसी गोस्वामी ने बिल्डिंग तान दी है जबकि वह अवैध कब्जा है पहले उस पर ध्यान दीजिए और नापजोख कीजिए वही स्थानीय लोगों ने राजस्व विभाग की टीम पर पूर्व पार्षद विष्णु यादव के इशारे पर सीमांकन करने का आरोप लगाया और अपना विरोध दर्ज कराया। बताया जा रहा है कि जब पुराने रिकॉर्ड के आधार पर सालों से काबिज रहवासियों ने राजस्व विभाग की टीम से अपनी बात रखना चाहा तो उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी उनकी ओर से वकील ने भी पक्ष रखा लेकिन एक न सुनी गई जिसका वकील और रहवासियों ने जमकर विरोध किया जिसके बाद राजस्व विभाग की टीम ठंडी पड़ी.
इन पर लग रहा पूर्व पार्षद तरफदारी करने का आरोप.

इससे पहले भी पूर्व पार्षद यादव ने किया था विवाद.
स्थानीय लोगों ने बताया कि इससे पहले भी सरकारी जमीन को कम बताकर चांटीडीह में पूर्व पार्षद विष्णु यादव ने भूमि कब्जियाने को लेकर भीड़ बुलाकर विवाद किया था और मामला सरकंडा थाने तक पहुंच गया था। लोगों का कहना है कि सत्ताधारी दल का चोला ओढ़ विष्णु यादव ने बिजली विभाग से भी तालमेल बिठा बिजली का खंभा कटवा दिया और अब बेवहज जमीन के पीछे पड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों की माने तो इस बार तब हद हो गई जब पूर्व पार्षद यादव ने खुद को न आगे कर किसी विजय अवस्थी नाम के शख्स को आवेदक बनाकर जमीन सीमांकन के लिए खड़ा कर दिया इधर इस मसले को लेकर पूर्व पार्षद विष्णु यादव से उनका पक्ष जानने संपर्क नहीं हो सका है।
राजस्व टीम पहुंची तो मौके पर फिर मचा विवाद.
विवाद को खत्म करने के लिए बीते दिनों राजस्व विभाग की टीम चांटीडीह पहुंची और विवादित जमीन की नाप-जोख शुरू की। बताया जा रहा है कि नाप-जोख के दौरान ही मौके पर जमकर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। मौके पर मौजूद लोगों के बीच बहस और आरोप-प्रत्यारोप का वीडियो भी सामने आया है। यह वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से 'OMG NEWS NETWORK' के हाथ लगा है, जिसमें जमीन की नाप-जोख के दौरान विवाद की स्थिति दिखाई दे रही है। सवाल यह है कि आखिर जिस जमीन को लेकर सरकारी रिकॉर्ड मौजूद हैं, वहां वर्षों से काबिज लोगों और पूर्व पार्षद के बीच बार-बार विवाद की नौबत क्यों आ रही है?
सरकारी जमीन पर ‘कब्जे’ से लेकर खरीद-फरोख्त तक सवाल.
चांटीडीह के इस पूरे मामले ने सरकारी जमीन की निगरानी और राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर जमीन सरकारी है तो कथित तौर पर उस पर चिड़िया बिठाकर उसे बेचने का अधिकार किसे और कैसे मिला? और यदि जमीन की खरीद-फरोख्त हुई है तो उसका रिकॉर्ड कहां है? स्थानीय रहवासियों के आरोपों की जांच के बाद ही इन सवालों का वास्तविक जवाब सामने आ सकेगा।
फिलहाल राजस्व विभाग की नाप-जोख के बाद यह मामला और गर्म हो गया है। रहवासी जहां अपने वर्षों पुराने कब्जे और दस्तावेजों के आधार पर अधिकार की बात कर रहे हैं, वहीं पूर्व पार्षद पर जमीन को अपने हिसाब से बताकर दबाव बनाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
अब निगाहें राजस्व विभाग की जांच और नाप-जोख की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सिर्फ एक जमीन विवाद नहीं, बल्कि सरकारी जमीन के कथित हेरफेर और खरीद-फरोख्त से जुड़ा बड़ा मामला बन सकता है।
